कपड़े और कविताएँ

कुछ दिन पहले की बात है,जिनके लिए इतनी सारी कथा, कहानी, किस्से लिखे,उन्होंने मुझे शायर कहा।‘सिर्फ लिखने से काम नहीं चलेगा’ ऐसा कहकर,कुछ दोस्तों ने मुझे कायर कहा। आगे की बातें करेंगे पर पहले यह बता दूँ कि ये सब मैंकपड़ा धोते वक्त सोच रहा था, कपड़े अधधुले छोड़करयह लिखने आया हूँ… क्योंकि आजकल लेखनContinue reading “कपड़े और कविताएँ”

अमावस है मेरी ज़िंदगी

कॉलेज का पहला सालअपनों से बिछड़ करदूर आ जाने के गम मेंउदास होकर होस्टल की बालकनी सेचाँद को ताकते रहताजिस रोज चाँद दूसरे हिस्से में चला जाताउस दिन पीछा करते-करतेकॉलेज की सैर पर निकल जाया करतापर साल बदला और शायद हालात भी बदलेउदासी थोड़ी कम हुई क्योंकि मेरा चाँद भी बदलापहले आसमान में ढूंढताअब ज़मीनContinue reading “अमावस है मेरी ज़िंदगी”