कॉलेज के पहले हीं दिन शिवेंद्र अपने पिताजी को स्टेशन छोड़कर वापस छात्रावास में आया तो खुश था कि चलो वर्षों कि तपस्या समाप्त हुई अब ये आखिरी छात्रावास है| इंजीनियरिंग के बाद तो एक अच्छी नौकरी होगी,अपना घर होगा मतलब पूरी तैयारी चल रही थी उसके दिमाग में तभी फ़ोन में पिताजी का मिस्डContinue reading “कुछ यादें ऐसी भी!”
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नीला आसमान सो गया….कलाम नहीं रहे।
28 जुलाई 2015, कोटा, राजस्थान मुझे बचपन से अखबार पढ़ने की आदत है। कोटा जैसी प्रतिस्पर्धी शहर में अखबार पढ़ रहें हैं तो शायद आप समय व्यर्थ कर रहे हैं, क्योंकि वहाँ का माहौल ऐसा है कि आप पूरा समय परीक्षा की तैयारी में झोंकते है। अपनी दैनिक दिनचर्या का पालन करते हुए उस दिनContinue reading “नीला आसमान सो गया….कलाम नहीं रहे।”
सफ़रनामा
रेलवे की घड़ी में 14:20 बज रहा था औऱ बिहार सम्पर्क क्रांति अपने निर्धारित समय से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से अपने जड़त्व से गति अवस्था में आ रही थी।स्लीपर कोच में निर्धारित आरक्षण से तिगुनी भीड़। स्थिति साक्षात भारत की जनसंख्या,मानव-पूँजी एवं राष्ट्रीय विविधता दर्शा रही थी।ट्रेन कुछ पांच मिनट तक रेंगती रही फिरContinue reading “सफ़रनामा”
वशिष्ठ जी का अवसान
कल बिहार के अखबारों के मुख्य पृष्ठ पर एक ऐसी खबर छपेगी, जिससे तमाम युवा वर्ग जो गणित और भौतिकी में रुचि रखते हैं या कभी रखते थे, उनमें मातम छाएगा। कई ऐसे भी होंगे, बिल्कुल मेरी तरह, जो इस महान गणितज्ञ से कभी मिलने के सपने देखा करते थे। मैं महसूस कर सकता हूँContinue reading “वशिष्ठ जी का अवसान”
कपड़े और कविताएँ
कुछ दिन पहले की बात है,जिनके लिए इतनी सारी कथा, कहानी, किस्से लिखे,उन्होंने मुझे शायर कहा।‘सिर्फ लिखने से काम नहीं चलेगा’ ऐसा कहकर,कुछ दोस्तों ने मुझे कायर कहा। आगे की बातें करेंगे पर पहले यह बता दूँ कि ये सब मैंकपड़ा धोते वक्त सोच रहा था, कपड़े अधधुले छोड़करयह लिखने आया हूँ… क्योंकि आजकल लेखनContinue reading “कपड़े और कविताएँ”
अमावस है मेरी ज़िंदगी
कॉलेज का पहला सालअपनों से बिछड़ करदूर आ जाने के गम मेंउदास होकर होस्टल की बालकनी सेचाँद को ताकते रहताजिस रोज चाँद दूसरे हिस्से में चला जाताउस दिन पीछा करते-करतेकॉलेज की सैर पर निकल जाया करतापर साल बदला और शायद हालात भी बदलेउदासी थोड़ी कम हुई क्योंकि मेरा चाँद भी बदलापहले आसमान में ढूंढताअब ज़मीनContinue reading “अमावस है मेरी ज़िंदगी”