4:47 AM, गांव की हवा वैसी ही है, पर कुछ बदली-बदली सी। पिछली बार जब यहां आया था, तब दिल्ली से बेंगलुरु शिफ्ट हुआ था। अब कॉरपोरेट की चकाचौंध में पूरा डूब चुका हूँ। काका ने हमेशा कहा था, “शहर चाहे जितनी तेज़ी से भागे, गांव की मिट्टी कभी छूटने नहीं देगी।” लेकिन ये हैंडपंपContinue reading “रामचनर काका 4.O: आधुनिकता का आँगन और हैंडपंप का ठंडा पानी”
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रामचनर काका 3.O: आधुनिकता का अत्याचार
माननीय मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल जी के पिछले दो कार्यकालों से प्रभावित होकर दिल्ली की जनता विधानसभा चुनाव के बाद केजरीवाल 3.O का स्वागत कर रही है ऐसे में हम अपने पाठकों की मांग पर लेकर आ रहे हैं रामचनर काका 3.O, रामचनर काका की दिलचस्प बातों की इस श्रृंखला में आगे पढ़ते हैं आधुनिकताContinue reading “रामचनर काका 3.O: आधुनिकता का अत्याचार”
रामचनर काका 2.O
हॉस्टल में बिजली नहीं है पिछले चौबीस घंटों से सिर्फ़ उतनी ही बिजली आई है जितना मेरे गांव में आया करती है दो से चार घंटे की बिजली वह भी बड़ी मुश्किल से। पिछले चौबीस घंटे एक ऐसा अनुभव दे गए जो कई मायने में महत्त्वपूर्ण है। एक अनुभव कहता है कि इतनी भीषण गर्मीContinue reading “रामचनर काका 2.O”
लोकसभा चुनाव वाया गाँव || रामचनर काका 1.O
3:40 AM,अरे नहीं आज इतनी देर तक जाग नहीं रहा,अभी सो कर उठा हूँ। पिछले कुछ दिनों से अपने गाँव आया हूँ तो यहाँ जल्दी सोना और सोकर उठ जाना आम बात है। अभी अचानक बचपन की वो बात याद आ गयी जब पिताजी,बाबा को बोलकर सुबह चार बजे भोर में उठाकर अंग्रेजी के बीसContinue reading “लोकसभा चुनाव वाया गाँव || रामचनर काका 1.O”