एक साल बाद की मुस्कान

किसको लिखें और क्या लिखें?
तुमको लिखें तो क्या लिखें?
सवाल लिखें या इज़हार लिखें?
या फिर पूरे एक साल बाद जो देखी,
वो खूबसूरत मुस्कान लिखें?

इत्तेफ़ाक का दौर अब पुराना हो चला,
अगले दिन मिलोगी ये सपने में देखा बीती रात ही।

जमाना हो गया, पर बदला कुछ नहीं,
देख कर तुम्हें दिल की धड़कन बेकाबू रही आज भी।
झलक ही तो देखी, हमने नज़रें तो मिली नहीं आज भी।

याद आ जाती हैं बातें पुरानी, न मिल पाने वाली मुलाकातें,
जब तुम्हारे गलियों से गुजरता हूँ आज भी।

यूँ पूरा दिन जाया किया ख्यालों और सवालों में,
कि नज़र भर देख न पाया आज भी।

देखा नहीं पूरा चेहरा, जैसे अधूरा निकला चाँद आज भी,
पर देखा वही खिला चेहरा, जैसे मुस्कुराता है मेरा चाँद आज भी… रोज़ ही!

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