तकिये तले खत

अब चुकि बादलों में छुप रहा आज का चाँद है,
खामोशी की तलाश में गुजर रही ये रात है।
अजीब सी बेचैनी हो रही है मन में,
सोच रहा हूँ, एक और खत लिख दूँ तुम्हारी याद में।
रख लूं तकिये के नीचे,
कहीं इसी बहाने तुम ख्वाब में आ जाओ,
इक मुलाकात हो जाए,
और शायद हमारी बात हो जाए।

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