बैगनी यादें

हाँ, बाहर बारिश हो रही है,
इतेफाक से उसके शहर से गुजरती है यह ट्रेन,
जिसमें मैं सफर कर रहा हूँ,
और पढ़ रहा हूँ उसकी पसंदीदा किताब,
जिसे आखिरी मुलाकात में वो इरादतन छोड़ गई थी।
यादें एक साथ चोट कर रही हैं,
जब-जब चिन्हित शब्दों को मेरी निगाहें पार कर रही हैं।
महसूस कर रहा हूँ उसकी उंगलियों की छुअन को,
इन पन्नों पर, जिनसे खुशबू उसके फिजाओं की आ रही है।
कुछ पन्नों पर चमकीले बैगनी रंग के निशान मिले हैं,
लगता है वर्षों से वो एक ही रंग की नेलपॉलिश लगाती आ रही है।
बीच के पन्ने पर एक सवाल लिखा है—
“इस पन्ने तक पहुंच गए, क्या अब भी तुम्हें मेरी याद आ रही है?”

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