आपकी कुछ फिल्में थी जो बचाकर रखना चाहता था। सोचा था इनको जिंदगी के उन लम्हों में देखूंगा जब कुछ और करने को न बचा हो।लेकिन आपका यूं असमय चले जाना एक सदमा है। ख़ैर, ये लम्हें, ये पल हम बरसों याद करेंगे…
“वैसे मैं वीरेन बाबू तो हूं नहीं जो आप मेरे लिए दूसरा जन्म लेके वापस आयेंगी!” आपकी सिर्फ एक फ़िल्म देखी है मैंने, ‘लम्हे’ वो भी उन दिनों में जब समय की किल्लत होती थी मतलब, जे.ई. ई की तैयारी कर रहा था।
एक दिन रेडियो पर ‘मोरनी बागां मां डोले’…ये गाना चल रहा था, मेरे कमरे में रहने वाले साथी गौरव से पता चला कि ये श्रीदेवी और अनिल कपूर की एक धांसू फ़िल्म लम्हें का गाना है। इतना काफ़ी था आपका ‘डाई हार्ड फैन’ बनने के लिए। तब से अब तक 2 वर्ष हो गये हैं लेकिन आपके चेहरे पर उभरी एक-एक प्रतिक्रया ज़ेहन में है मेरे।
‘मेघा रे मेघा’ गाने में आपकी पहली झलक पाने के बाद, जैसे वीरेन बाबू को मन्त्रमुग्ध होते हैं उससे कम मंत्रमुग्ध मैं भी नही था।
‘गुड़िया रानी’ तो बचपन से रेडियो पर सुनते आ रहा हूं लेकिन ये आप पर फिल्मायी गई है ये भी उस रोज ही पता चला था।
अंत में आपने ‘मेरी बिंदिया तेरी निंदिया, में जो प्रतिक्रिया दी है वो अब तक के मेरे बेहतरीन पलों में से एक है।
एक हीं फ़िल्म में माँ और बेटी जैसे कठिन किरदार निभा कर आपने ये तो दिखा दिया था कि आने वाले समय में आपका स्थान कोई औऱ नहीं ले सकता।