3:40 AM,अरे नहीं आज इतनी देर तक जाग नहीं रहा,अभी सो कर उठा हूँ। पिछले कुछ दिनों से अपने गाँव आया हूँ तो यहाँ जल्दी सोना और सोकर उठ जाना आम बात है। अभी अचानक बचपन की वो बात याद आ गयी जब पिताजी,बाबा को बोलकर सुबह चार बजे भोर में उठाकर अंग्रेजी के बीस अक्षर याद करने को कहते थे। तब बिहार में चारा घोटाला के चर्चे ज़ोरों पर थे लेकिन जो घोटाला मैंने बाबा के साथ मिलकर अंग्रेजी के उन शब्दों और सुबह के चार बजे की नींदों का किया, कसम से वो मज़ा उन घोटालेबाजों को पैसों का घपला करके नहीं आया होगा। वैसे घोटाला करके नुकसान ही होता है इसका अंदाज़ा अब होने लगा है वरना अंग्रेजी में अपना हिसाब-किताब भी काफी हद तक सही होता।
शायद पिताजी को मेरे उठ जाने का आभास हो गया था,तभी तो उन्होंने आवाज़ लगाई ‘अरे उठ गए हो तो बाहर आ जाओ देखो ‘रामचनर काका’ आये हैं, तुम्हारा हाल पूछ रहे हैं’।अब ये काका गांव में कैसे और कब रामचंद्र से रामचनर बने ये उनको भी नहीं पता हैं। ‘अभी आया पिताजी’, कहने के साथ-साथ आगामी लोकसभा चुनाव में कौन कहां से चुनाव लड़ रहा है इसके लिए मुझे तैयार होना था।वरना रामचनर काका के सामने तुम्हारी इंजीनियरिंग की डिग्री किसी काम की नहीं होगी।
‘पाए लागूं काका’
‘शहर जाकर यहां के संस्कार भूले नहीं तुम अच्छी बात है!’
‘जी काका’
‘और बताओ,सब बढ़िया? क्या हाल खबर दिल्ली की?’
ख़याल आया कि काका को बता दूं कि ‘काका अब आये हैं आप असली मुद्दे पर!
‘सब बढ़िया काका,बस……’
‘हाँ हाँ समझ गया तुम्हारा कॉलेज कोई पार्लियामेंट से कम थोड़े ही है,बहुत नखरे हैं तुमलोगों के भी’
रामचनर काका ठीक ही कह रहे हैं हमारा कॉलेज पार्लियामेंट से कम थोड़े है-अब आप ही देखिये आर्डिनेंस हम कब खोलते हैं? एग्जाम के तुरंत पहले ताकि सिलेबस से अवगत हो लें बिलकुल किसी राजनीतिक पार्टी की तरह जिनको मैनिफेस्टो की याद सिर्फ चुनाव के आने पर ही आती है। वैसे इन राजनीतिक पार्टियों के मैनिफेस्टो का वही औचित्य है जो हमारे मैनिफेस्टो का हुआ करता है, याद है हम सबने एक मैनिफेस्टो बनाया था दिमाग में,कॉउंसलिंग खत्म होने और कॉलेज शुरू होने के बीच के समय में कि कॉलेज में जाकर आखिर करना क्या है।
वैसे काका इक बात बताइये ‘ई नेता लोग पार्लियामेंट में रेगुलर क्यों नहीं रहता?’ काका मुंडी झटक के बोले ‘तू कोनसा रोज कॉलिज जाता है वहां, अभी पिछले हफ़्ते ही मैसेज आया था कि तू क्लास नहीं लगा रहा!’
काका हमारी बिल्कुल सही ख़बर ले रहे थे और पिताजी बगल में बैठकर बस मुस्कुराये जा रहे थे!
काका जाते-जाते कह गए- ‘एकबार नेता लोग जीतकर सरकार बना ले फिर मैनिफेस्टो को कोई नहीं देखता वही हाल तुमलोगन का होता है,एक बार बस कटऑफ पार कर लिए और कॉलेज में दाखिला हो गया फिर तुम भी अपने मैनिफेस्टो के तरफ मुड़कर नहीं देखते बस वर्तमान में जीने लगते हो!’
हाँ एक बात में अलग है अपना कॉलेज लाइफ यहाँ से सिर्फ चार साल में विदा लेते हैं तो वही लोकसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है पर ये अलग बात है कि यहाँ कॉलेज में सप्ली और उसके बाद बैक लाकर कुछ लोग यहाँ भी इंजीनियरिंग की डिग्री को पंचवर्षीय योजना का हिस्सा बना देते हैं।
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